Benefits of BrijBooti Nagarmotha Root
- Traditionally used for digestion
- Helpful in gas and indigestion
- Balances body heat
- Useful in mild diarrhea
- Used in skin care practices
What is BrijBooti Nagarmotha Root
BrijBooti Nagarmotha Root – Cyperus Rotundus is pure and natural herb provided only in raw form without any modification or chemical processing. The herb is offered in its original natural state.
How to Use BrijBooti Nagarmotha Root
- ½ to 1 teaspoon with lukewarm water
- Can be used as herbal decoction
- Use once daily in moderate quantity
Nagarmotha has been part of Ayurvedic practices for generations. The herb is associated with supporting digestive comfort, balancing body heat, and maintaining stomach wellness. Household remedies have used it for mild stomach issues and skin applications.
This is a traditional herb and not a medical treatment.
नागरमोथा जड़ के फायदे
- पारंपरिक रूप से पाचन सुधार में सहायक माना जाता है
- गैस और अपच में उपयोगी समझा जाता है
- शरीर की गर्मी संतुलित करने में सहयोगी
- दस्त और पेट की हल्की परेशानियों में मददगार
- त्वचा की देखभाल में पारंपरिक उपयोग
नागरमोथा जड़ क्या है
BrijBooti Nagarmotha Root (Cyperus Rotundus Rhizome) शुद्ध और प्राकृतिक जड़ है, जो बिल्कुल रॉ रूप में उपलब्ध कराई जाती है। इस हर्ब को किसी भी प्रकार से मॉडिफाई या केमिकल प्रोसेस नहीं किया गया है। यह जैसी प्रकृति में प्राप्त होती है, वैसी ही अपने असली स्वरूप में प्रदान की जाती है।
नागरमोथा जड़ का इस्तेमाल कैसे करें
- आधा से एक चम्मच पाउडर गुनगुने पानी के साथ लें
- काढ़ा बनाकर पारंपरिक रूप से उपयोग करें
- दिन में एक बार सीमित मात्रा में प्रयोग करें
BrijBooti Nagarmotha Root आयुर्वेद में बहुत पुरानी और उपयोगी जड़ी मानी जाती है। यह पूरी तरह प्राकृतिक रॉ फॉर्म में उपलब्ध है, बिना किसी केमिकल बदलाव के। पारंपरिक घरेलू नुस्खों में नागरमोथा का उपयोग पाचन और पेट की समस्याओं के लिए किया जाता रहा है।
आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार नागरमोथा शरीर की गर्मी को संतुलित करने, गैस–अपच को कम करने और आंतों को आराम देने में सहायक समझी जाती है। दस्त, पेट दर्द और भारीपन जैसी स्थितियों में इसका उपयोग घरेलू उपाय के रूप में किया जाता रहा है।
त्वचा संबंधी कुछ पारंपरिक प्रयोगों में भी नागरमोथा का लेप किया जाता रहा है। सीमित मात्रा में इसका उपयोग शरीर को हल्का और संतुलित रखने में मददगार माना जाता है।
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