Benefits of BrijBooti Jiya Pota
- Traditionally linked with women’s wellness
- Helpful for menstrual balance
- Supports hormonal harmony
- Associated with reproductive health
- Nourishes body tissues
What is BrijBooti Jiya Pota
BrijBooti Jiya Pota – Putrajivak (Roxburghii) is pure and natural herb provided only in raw form without any modification or chemical processing. The herb is offered in its original natural state.
How to Use BrijBooti Jiya Pota
- ½ teaspoon with lukewarm water or milk
- Commonly used in the morning on empty stomach
- Use once daily in moderate quantity
Putrajivak, popularly known as Jiya Pota, has been part of traditional Indian practices for many years. The herb is associated with female reproductive wellness in folk understanding. Household remedies have used it with the belief of supporting natural hormonal balance and menstrual comfort.
It is considered supportive for overall feminine health when used carefully and in small quantity. This is a traditional herb and not a medical treatment.
बृजबूटी पुत्रजीवक के फायदे
- पारंपरिक रूप से स्त्री स्वास्थ्य के लिए सहायक माना जाता है
- मासिक चक्र के संतुलन में उपयोगी समझा जाता है
- हार्मोनल संतुलन में सहयोगी
- प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी पारंपरिक जड़ी
- शरीर की धातुओं को पोषण देने में मददगार
बृजबूटी पुत्रजीवक क्या है
BrijBooti Jiya Pota (Putrajivak / PutraJeevak – Roxburghii) शुद्ध और प्राकृतिक बीज हैं, जो बिल्कुल रॉ रूप में उपलब्ध हैं। इस हर्ब को किसी भी प्रकार से मॉडिफाई या केमिकल प्रोसेस नहीं किया गया है। यह जैसी प्रकृति में प्राप्त होती है, वैसी ही अपने असली स्वरूप में प्रदान की जाती है।
पुत्रजीवक का इस्तेमाल कैसे करें
- आधा चम्मच पाउडर गुनगुने पानी या दूध के साथ लें
- सुबह खाली पेट उपयोग अधिक प्रचलित है
- दिन में एक बार सीमित मात्रा में प्रयोग करें
पुत्रजीवक आयुर्वेद और लोक परंपराओं में बहुत पुराने समय से उपयोग की जाने वाली जड़ी है। यह पूरी तरह प्राकृतिक रॉ फॉर्म में उपलब्ध है, बिना किसी केमिकल बदलाव के। पारंपरिक मान्यताओं में पुत्रजीवक बीज को स्त्री प्रजनन स्वास्थ्य और हार्मोन संतुलन से जोड़कर देखा जाता रहा है।
घरेलू नुस्खों में इसका उपयोग महिलाओं के मासिक चक्र को संतुलित रखने और गर्भाशय को सहयोग देने के लिए किया जाता रहा है। इसे शरीर की धातुओं को पोषण देने और कमजोरी कम करने में सहायक माना गया है। कई क्षेत्रों में इसका प्रयोग पारिवारिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है।
यह समझना जरूरी है कि यह एक पारंपरिक हर्ब है और किसी चिकित्सकीय इलाज का विकल्प नहीं है। इसका उपयोग हमेशा सीमित मात्रा और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए।
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