Benefits of Brijbooti Gond Siyah
- Traditionally used for joint and back support
- Helps nourish body tissues
- Provides warmth in winter
- Useful in weakness and fatigue
- Supports bone and muscle strength
What is Brijbooti Gond Siyah
Brijbooti Gond Siyah – Kala Gond (Black Gum) is pure and natural gum provided only in raw form without any modification or chemical processing. It is offered in its original natural state.
How to Use Brijbooti Gond Siyah
- Take 1–2 grams with milk
- Use in traditional laddoo or recipes
- Consume in moderate quantity
Gond Siyah has been part of Indian traditional diets for many years. It is associated with supporting joint comfort, back strength, and overall body nourishment. Household practices have used black gum especially during winters for maintaining warmth and energy.
It is considered a traditional food ingredient and not a medical treatment.
गोंद सिया के फायदे
- पारंपरिक रूप से जोड़ों और कमर की मजबूती में सहायक माना जाता है
- शरीर की धातुओं को पोषण देने में उपयोगी
- सर्दियों में शरीर को गर्माहट देने में मददगार
- थकान और कमजोरी में सहयोगी
- हड्डियों व मांसपेशियों के लिए पारंपरिक टॉनिक
गोंद सिया क्या है?
Brijbooti Gond Siyah (Kala Gond / Black Gum) शुद्ध और प्राकृतिक गोंद है, जो बिल्कुल रॉ रूप में उपलब्ध कराया जाता है। इसे किसी भी प्रकार से मॉडिफाई या केमिकल प्रोसेस नहीं किया गया है। यह जैसी प्रकृति में प्राप्त होता है, वैसा ही अपने असली स्वरूप में प्रदान किया जाता है।
गोंद सिया का इस्तेमाल कैसे करें
- 1–2 ग्राम गोंद दूध के साथ लिया जा सकता है
- लड्डू या पारंपरिक व्यंजन में मिलाकर उपयोग करें
- सर्दियों में सीमित मात्रा में सेवन करें
Brijbooti Gond Siyah भारतीय घरेलू परंपराओं में बहुत पुराना और भरोसेमंद आहार माना जाता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक रॉ फॉर्म में है, बिना किसी केमिकल बदलाव के। ग्रामीण नुस्खों में काला गोंद खासतौर पर जोड़ों, कमर और शरीर की मजबूती के लिए उपयोग किया जाता रहा है।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार गोंद शरीर को अंदर से पोषण देने, हड्डियों को ताकत देने और मांसपेशियों की थकान कम करने में सहायक समझा जाता है। सर्दियों के मौसम में गोंद के लड्डू या दूध के साथ सेवन करने की परंपरा बहुत प्रचलित रही है, क्योंकि इसे शरीर में गर्माहट बनाए रखने वाला माना जाता है।
महिलाओं और बुजुर्गों में इसे कमजोरी, कमर दर्द और जोड़ों की जकड़न में घरेलू सहायक के रूप में लिया जाता रहा है। यह एक पारंपरिक आहार है, दवा नहीं।
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