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गोखरू छोटा के फायदे | किडनी के पथरी के लिए | सेक्सुअल समस्याओं के लिए |

गोखरू छोटा के फायदे

गोखरू एक ऐसी जड़ी बूटी है जो सदियों से मानव के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद ही साबित हुआ है। ये उन जड़ी बूटियों में से एक है जो वात पित्त और कफ तीनों को नियंत्रित करने में सहायता करती है। गोखरू का फल, पत्ता और तना आयुर्वेद में औषधि के रूप में प्रयोग (gokhru ke fayde) किये जाता है। ये सिर्फ बीमारियों के लिए नहीं बल्कि यौन समस्याओं को ठीक करने में बहुत फायदेमंद साबित होता है। आइये जानते हैं गोखरू का उपयोग और गोखरू छोटा के फायदे 

गोखरू क्या है? (What is Gokhru in Hindi?)

गोखरू छोटा (Tribulus terrestris) एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसे अंग्रेजी में “Small Caltrops” के नाम से जाना जाता है। यह पौधा छोटे कँटीले फलों के साथ-साथ पीले फूलों से युक्त होता है और पूरे विश्व में विशेषकर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है।

गोखरू छोटा का पौधा मुख्य रूप से शुष्क और बंजर भूमि में उगता है। यह पौधा अपने कँटीले बीजों के लिए जाना जाता है, जो जमीन पर गिरकर फैलते हैं और नए पौधों को जन्म देते हैं। इसके बीज और फल औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में उपयोगी होते हैं।

इस पौधे के औषधीय उपयोग प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध हैं। आयुर्वेद में इसे विशेष रूप से किडनी की समस्याओं, मूत्र संबंधी विकारों, और यौन स्वास्थ्य को सुधारने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, यह पौधा एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-पायरेटिक, और एंटी-डायरियाल गुणों से युक्त है, जो विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में मदद करते हैं।

गोखरू छोटा का पाउडर, काढ़ा, और अर्क के रूप में सेवन किया जा सकता है। इसके सेवन से किडनी की पथरी, दस्त, बुखार, दमा, और सिरदर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। हालांकि, इसका सेवन चिकित्सक की सलाह अनुसार और निर्धारित मात्रा में ही करना चाहिए, ताकि इससे होने वाले किसी भी संभावित नुकसान से बचा जा सके।

अन्य भाषाओं में गोखरू के नाम (Name of Gokshur in Different Languages?)

  • Name of Gokhru or Gokshura in Sanskrit –गोक्षुरक, त्रिकण्ट, स्वादुकण्टक, गोकण्टक, गोक्षुरक,वन शृङ्गाट, पलङकषा,  श्वदंष्ट्रा, इक्षुगन्धिका, चणद्रुम;
  • Name of Gokhru in Hindi –गोखरू, छोटा गोखरू, हाथीचिकार;
  • Name of Gokhru in Oriya –गाखुरा (Gokhura), गोक्षरा (Gokshra);
  • Name of Gokhru in Urdu –गोखरू (Gokharu);
  • Name of Gokhru in Kannada –नेग्गिलुमुल्लु (Negillumullu), नेरूंजी (Nerunji);
  • Name of Gokhru in Gujrati –बेटागोखरू (Betagokharu), नहानगोखरू (Nahanagokharu);
  • Name of Gokhru in Tamil –नेरिंजिल (Nerinjil), नेरींजीकाई (Nerinjeekai);
  • Name of Gokhru in Telugu –पाल्लैरु (Palleru), चिरूपाल्लैरू (Chirupalleru), चिरूपल्लेख (Cherupallekh);
  • Name of Gokhru in Bengali –गोखरू (Gokharu), गोखुरी (Gokhuri);
  • Name of Gokhru in Punjabi –बखरा (Bakhra), लोटक (Lotak), भखर (Bhakhar);
  • Name of Gokhru in Marathi –शराट्टे (Sharatte), काटे गोखरू (Kate gokharu), लहानगोखरू (Lahangokharu), सरला ज्ञरोत्ते (Sarla gyarote);

गोखरू छोटा के फायदे (Benefits and Uses of Gokshura in Hindi)

गोखरू के सामान्य फायदों (gokhru ke fayde) के बारे में तो सुना है लेकिन ये किस तरह और कौन-कौन से बीमारियों के लिए फायदेमंद है चलिए जानते है।

Kidney Problem

1. किडनी के पथरी के लिए गोखरू छोटा के फायदे

गोखरू छोटा का उपयोग किडनी की पथरी के इलाज में प्राचीन काल से ही किया जाता रहा है। इसके उपयोग के पीछे कई वैज्ञानिक और पारंपरिक कारण हैं, जो इसे किडनी की पथरी के लिए प्रभावी बनाते हैं।

मूत्रवर्धक गुण

गोखरू छोटा में मूत्रवर्धक (diuretic) गुण होते हैं, जो मूत्र उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं। यह गुण किडनी के माध्यम से विषाक्त पदार्थों और खनिजों को बाहर निकालने में सहायक होता है, जिससे किडनी की पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है। नियमित रूप से गोखरू छोटा का सेवन करने से मूत्रमार्ग साफ रहता है और पथरी के कण मूत्र के साथ बाहर निकल जाते हैं।

पथरी को तोड़ने में मदद

गोखरू छोटा के सेवन से किडनी की पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में मदद मिलती है। इसके रासायनिक संघटक पथरी को घुलने और टूटने में सहायता करते हैं, जिससे यह मूत्र के माध्यम से आसानी से बाहर निकल जाती है।

सूजन और दर्द में राहत

किडनी की पथरी अक्सर सूजन और तेज दर्द का कारण बनती है। गोखरू छोटा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने और दर्द को राहत देने में सहायक होते हैं। इसका सेवन करने से मूत्रमार्ग और किडनी में होने वाली सूजन कम होती है और पथरी के कारण होने वाले दर्द से राहत मिलती है।

विषाक्त पदार्थों का निष्कासन

गोखरू छोटा के नियमित सेवन से शरीर से विषाक्त पदार्थों का निष्कासन होता है। यह किडनी को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब किडनी सही तरीके से काम करती है, तो पथरी बनने की संभावना भी कम हो जाती है।

उपयोग की विधि

किडनी की पथरी के इलाज के लिए गोखरू छोटा का सेवन विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है:

  1. गोखरू छोटा का काढ़ा: एक चम्मच गोखरू पाउडर को दो कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छानकर पी लें। यह काढ़ा दिन में दो बार सेवन करना चाहिए

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2.सेक्सुअल समस्याओं के लिए गोखरू छोटा के फायदे

गोखरू छोटा का उपयोग यौन स्वास्थ्य सुधारने में अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह औषधीय पौधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए यौन समस्याओं के इलाज में सहायक हो सकता है। गोखरू छोटा के बीजों में फाइटोस्टेरोल्स, सैपोनिन्स और फ्लेवोनोइड्स जैसे सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जो यौन स्वास्थ्य को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पुरुषों के लिए लाभ

पुरुषों में, गोखरू छोटा का सेवन इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नपुंसकता) के इलाज में मदद करता है। यह रक्त परिसंचरण को सुधारता है, जिससे लिंग में रक्त प्रवाह बेहतर होता है और इरेक्शन की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके अलावा, यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है, जो यौन शक्ति और स्टैमिना को बढ़ाता है। इससे पुरुषों की यौन इच्छा और प्रदर्शन में वृद्धि होती है।

महिलाओं के लिए लाभ

महिलाओं में, गोखरू छोटा का सेवन हार्मोनल असंतुलन को दूर करने में मदद करता है। यह महिलाओं की यौन इच्छा (लिबिडो) को बढ़ाता है और यौन संबंधी समस्याओं, जैसे वजाइनल ड्राईनेस और ऑर्गेज्म की कठिनाई को कम करने में सहायक होता है। इसके अलावा, गोखरू छोटा मासिक धर्म की समस्याओं, जैसे पीएमएस और मासिक धर्म के दौरान दर्द को कम करने में भी उपयोगी होता है।

समग्र लाभ

गोखरू छोटा का नियमित सेवन शरीर में ऊर्जा और स्टैमिना को बढ़ाता है, जिससे यौन स्वास्थ्य में समग्र सुधार होता है। यह तनाव और मानसिक थकान को कम करता है, जो यौन प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। आयुर्वेद में, गोखरू छोटा को एक ‘रसायन’ माना जाता है, जो शरीर को पोषण देता है और जीवन शक्ति को बढ़ाता है।


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3. बुखार में गोखरू के फायदे

गोखरू छोटा का उपयोग बुखार को कम करने में बहुत प्रभावी माना जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) और एंटी-पायरेटिक (anti-pyretic) गुण होते हैं, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और बुखार को कम करने में मदद करते हैं।

जब शरीर में किसी प्रकार का संक्रमण होता है, तो इम्यून सिस्टम उसे लड़ने के लिए तापमान बढ़ा देता है, जिससे बुखार होता है। गोखरू छोटा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और जलन को कम करते हैं, जिससे शरीर का तापमान सामान्य होता है। इसके अलावा, इसके एंटी-पायरेटिक गुण बुखार को कम करने में सहायक होते हैं।

गोखरू छोटा का काढ़ा बनाकर पीने से बुखार में राहत मिलती है। इसके लिए 1 चम्मच गोखरू पाउडर को 2 कप पानी में उबालें और जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छानकर पी लें। इस काढ़े का सेवन दिन में दो बार करने से बुखार कम होने में मदद मिलती है।


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4. दस्त रोकने में फायदेमंद गोखरू

गोखरू छोटा का उपयोग दस्त रोकने में बहुत फायदेमंद माना जाता है। दस्त या डायरिया एक सामान्य पाचन समस्या है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार ढीला मल आता है और पेट में ऐंठन हो सकती है। इस स्थिति में शरीर से बहुत अधिक पानी और लवण निकल जाते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन और कमजोरी हो सकती है। गोखरू छोटा में मौजूद एंटी-डायरियल गुण दस्त को रोकने और पेट की सेहत को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।

गोखरू छोटा का पाउडर या काढ़ा दस्त के उपचार में उपयोगी होता है। इसका सेवन करने से आंतों में सूजन कम होती है और पाचन तंत्र को राहत मिलती है। गोखरू छोटा के काढ़े को तैयार करने के लिए एक चम्मच गोखरू पाउडर को दो कप पानी में उबालें और जब यह पानी आधा रह जाए, तो इसे छानकर दिन में दो बार पी लें। इसके नियमित सेवन से दस्त में राहत मिलती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।

गोखरू छोटा में मौजूद प्राकृतिक यौगिक आंतों की मांसपेशियों को शांत करने में मदद करते हैं, जिससे बार-बार मल त्याग की प्रवृत्ति कम हो जाती है। इसके अलावा, यह आंतों की दीवारों को भी मजबूत करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया में सुधार होता है। इस प्रकार, गोखरू छोटा न केवल दस्त को रोकने में प्रभावी है, बल्कि यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


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5. दमा से दिलाये राहत

गोखरू छोटा (Tribulus terrestris) का उपयोग दमा या अस्थमा के इलाज में लाभकारी माना जाता है। अस्थमा एक श्वसन रोग है जिसमें सांस लेने में कठिनाई होती है और श्वसन नलियों में सूजन आ जाती है। गोखरू छोटा में प्राकृतिक ब्रोंकोडायलेटर गुण होते हैं, जो श्वसन नलियों को चौड़ा करके श्वास प्रक्रिया को सुगम बनाते हैं।

गोखरू छोटा का काढ़ा या पाउडर श्वसन तंत्र में जमा बलगम को कम करने में मदद करता है, जिससे श्वसन मार्ग साफ रहता है और सांस लेने में आसानी होती है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करते हैं और श्वसन नलियों की संकुचन को रोकते हैं, जिससे दमा के लक्षणों में राहत मिलती है। यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने में भी सहायक होता है, जिससे बार-बार होने वाले अस्थमा के हमलों की संभावना कम हो जाती है।

इसके अलावा, गोखरू छोटा का सेवन शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है, जिससे शरीर विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से लड़ने में सक्षम हो जाता है। नियमित सेवन से दमा के मरीजों को लंबे समय तक राहत मिल सकती है और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।


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6. सिरदर्द में गोखरू काढ़ा के फायदे

गोखरू छोटा का काढ़ा सिरदर्द के इलाज में एक प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। सिरदर्द विभिन्न कारणों से हो सकता है, जैसे तनाव, माइग्रेन, साइनस, थकान या अन्य शारीरिक समस्याएँ। गोखरू छोटा में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुणों से युक्त होते हैं, जो सिरदर्द को कम करने में मदद करते हैं।

गोखरू का काढ़ा तैयार करने के लिए 1 चम्मच गोखरू पाउडर को 2 कप पानी में उबालें। इसे तब तक उबालें जब तक पानी आधा रह जाए। इस काढ़े को छानकर गर्म ही सेवन करें। गोखरू का काढ़ा तनाव को कम करता है और माइग्रेन के गंभीर सिरदर्द में राहत प्रदान करता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मस्तिष्क की सूजन को कम करते हैं, जिससे सिरदर्द में आराम मिलता है।

इसके अलावा, गोखरू का काढ़ा शारीरिक और मानसिक थकान को भी दूर करता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से सिरदर्द के आवृत्ति और तीव्रता में कमी आ सकती है। हालांकि, यदि सिरदर्द बहुत अधिक हो या लंबे समय तक बना रहे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। गोखरू छोटा के काढ़े का सेवन चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ही करना चाहिए, ताकि इसके सभी लाभ प्राप्त हो सकें और किसी भी तरह के संभावित दुष्प्रभावों से बचा जा सके।


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गोखरू छोटा का सेवन कैसे करें

गोखरू छोटा का सेवन विभिन्न रूपों में किया जा सकता है, जैसे पाउडर, कैप्सूल, काढ़ा आदि। यहाँ कुछ सामान्य तरीकों का वर्णन किया गया है:

  1. गोखरू छोटा पाउडरगोखरू छोटा के पाउडर को आप पानी या दूध में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। इसे दिन में दो बार लेने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
  2. गोखरू छोटा का काढ़ागोखरू का काढ़ा बनाने के लिए, 1 चम्मच गोखरू पाउडर को 2 कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छानकर पी लें। यह काढ़ा किडनी की समस्याओं और सिरदर्द के इलाज में उपयोगी होता है।


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